भारत में तकनीकी‑क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। बेंगलुरु‑आधारित स्टार्ट‑अप QpiAI ने हाल ही में 64 क्यूबिट वाला क्वांटम प्रोसेसर चिप Kaveri लॉन्च किया है — जिसे “भारत का पहला 64‑क्यूबिट क्वांटम चिप” कहा जा रहा है।
यह सिर्फ संख्या नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारत अब क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई के संगम में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है। इस ब्लॉग में हम देखेंगे कि यह क्या है, क्यों महत्वपूर्ण है, और आगे कैसे यह तकनीक विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव ला सकती है।
What is Kaveri?
“Kaveri” नामक यह चिप विशेष रूप से ज़रूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है: उच्च प्रदर्शन वाले कम्प्यूटेशनल कार्यों के लिए, जैसे कि एआई‑मॉडलिंग, वैज्ञानिक सिमुलेशन, और जटिल अनुकूलन (optimization) समस्याएँ। QpiAI की वेबसाइट के अनुसार, इस चिप में “superconducting flip‑chip integrated” तकनीक का प्रयोग हुआ है, जिससे क्यूबिट्स‑इंटरकनेक्ट्स को कम लॉस और बेहतर स्थिरता के साथ जोड़ा गया है।
उनके “Technology” पेज में यह भी उल्लेख है कि Kaveri 64 क्यूबिट (QS) वाला NISQ (Noisy Intermediate‑Scale Quantum) चिप होगा, जिसमें “target coherence time ~100 µs” और त्रुटि‑दर (error rate) ~10⁻² रखने का लक्ष्य है।
साधारण भाषा में कहें तो: साधारण कंप्यूटर कुछ प्रकार के सवालों को बेहद बड़ी संख्या में विकल्पों में से चुन‑चुन कर हल नहीं कर पाते; क्वांटम चिप्स उन सवालों को बहुत तेजी से सिमुलेट या अनुकूलित कर सकते हैं। Kaveri इस दिशा में भारत का कदम है।
Why is it important for India?
भारत के लिए इस तरह का विकास कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास: जब भारत में‑आधारित कंपनी एक 64‑क्यूबिट चिप की घोषणा करती है, तो यह संकेत है कि सिर्फ सॉफ्टवेयर‑उपयोग तक सीमित न रहकर हार्डवेयर‑स्तर पर भी भारत सक्रिय है।
उद्योग एवं अनुसंधान में अवसर: इस चिप के माध्यम से विज्ञान, स्वास्थ्य‑संबंधित शोध, सामग्री (materials) विकास, लॉजिस्टिक्स, वित्त जैसे क्षेत्रों में नए प्रयोग संभव हो सकते हैं। Startuppedia के अनुसार, QpiAI का यह दावा है कि Kaveri भविष्य में उद्योगों, शोध इकाइयों तथा विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराई जाएगी।
राष्ट्रीय रणनीति में योगदान: भारत की National Quantum Mission के तहत क्वांटम तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है और इस प्रकार की पहल उस रणनीति के अनुरूप है।
प्रतिस्पर्धात्मक लाभ: विश्वस्तर पर भी कई देश क्वांटम कंप्यूटिंग में आगे बढ़ रहे हैं — भारत का इस क्षेत्र में शामिल होना रणनीतिक दृष्टि से मायने रखता है।
What are the technical details and roadmap?
जब हम तकनीकी दृष्टि से देखें तो QpiAI ने अपनी वेबसाइट पर Kaveri के लिए एक रोड‑मैप प्रस्तुत किया है।
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- वर्तमान जनरेशन: 25 क्यूबिट वाला चिप “Indus” पहले लॉन्च हो चुका है।
- अगले चरण में: Kaveri – 64 क्यूबिट चिप (Q1 2026 तक)
- आगे‑आगे: Ganges (128 क्यूबिट, Q1 2027) तथा Everest (1000 क्यूबिट, Q1 2028) जैसी योजनाएं
- तकनीकी लक्ष्य: Superconducting transmon qubits, 2D square lattice + 3D integration, coherence time ~100 µs, त्रुटि‑दर ~10⁻²।
इन सबका मतलब यह है कि यह एक प्रारंभिक लेकिन महत्वूू की दिशा में कदम है — अभी बहुत कुछ परीक्षण‑चरण में है और व्यावसायिक उपलब्धि तक पहुँचने में समय लगेगा।
Challenges & Considerations
हालाँकि यह एक उत्साहजनक विकास है, कुछ बातों को ध्यान में रखना भी जरूरी है:
64 क्यूबिट “मात्र संख्या” है — लेकिन क्वांटम कंप्यूटिंग में कार्य‑प्रदर्शन (fidelity), गलती‑दर (error rate), क्यूबिट की स्थिरता (coherence time), तथा वास्तविक कैस (real‑world) अनुप्रयोगों में इसका व्यवहार बहुत मायने रखता है।
कई लोगों ने इस विषय पर चर्चा की है और कहा है कि “हमारे देश में अभी तक पूर्ण रूप से स्वतंत्र क्वांटम चिप के लिए सभी घटक स्वदेशी नहीं हो सकते”। उदाहरण के लिए Reddit पर एक टिप्पणी:
“I have a lot of connections with experts in the Quantum Computing industry. Some of them are currently working in IBM, D‑Wave, and other notable names … The components for that one are sourced outside of India and assembled here.”
व्यावसायिक उपयोग (commercial use) तक पहुँचने में समय लगेगा और (जैसा QpiAI ने कहा है) Kaveri को “टेस्टिंग और वैलिडेशन” के बाद उद्योगों, शोध संस्थानों को उपलब्ध कराया जाएगा।
इसलिए, इसे सिर्फ “बिल्कुल तैयार व व्यापक रूप से इस्तेमाल में” मान लेना अभी सही नहीं होगा — लेकिन यह भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।
What this means for AI and Scientific Computing?
एआई में आगे बढ़ने का अवसर: जब क्वांटम‑चिप जैसी क्षमताएँ आएँगी, तो एआई‑मॉडलिंग, बड़े डेटा विश्लेषण, जटिल अनुकूलन (optimization) कार्य जैसे क्षेत्रों में गति और क्षमता दोनों बढ़ सकती हैं। QpiAI स्वयं “AI to Quantum” दृष्टिकोण अपना रही है।
वैज्ञानिक अनुसंधान में बदलाव: नई सामग्री की खोज (materials discovery), दवाओं का विकास, मौसम‑सिमुलेशन, आणविक (molecular) मॉडलिंग आदि में क्वांटम सिमुलेशन का महत्व बढ़ता जा रहा है — Kaveri जैसे चिप के माध्यम से देश में इन क्षेत्रों की क्षमताएँ बढ़ सकती हैं।
उद्योगों के लिए विकल्प: लॉजिस्टिक्स, वित्त, उत्पादन, ऊर्जा जैसे उद्योगों में उस तरह के कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग की मांग है जिसे पारंपरिक कंप्यूटर हमेशा सहजता से नहीं कर पाते। क्वांटम तकनीकों से नया विकल्प खुल सकता है।
